निकाय आरक्षण विवाद: भाजपा का दावा विधि सम्मत, कांग्रेस ने उठाए सवाल

 देहरादून, – उत्तराखंड में निकाय चुनावों के लिए घोषित अनंतिम आरक्षण को लेकर सियासत गरमा गई है। जहां भाजपा ने इसे पूरी तरह विधिसम्मत बताते हुए कांग्रेस पर चुनाव से बचने के आरोप लगाए हैं, वहीं कांग्रेस ने आरक्षण प्रक्रिया पर सवाल उठाकर इसे अस्पष्ट और भेदभावपूर्ण करार दिया है।

भाजपा के वरिष्ठ विधायक और विधानसभा की प्रवर समिति के सदस्य विनोद चमोली ने प्रेस वार्ता में कहा कि आरक्षण प्रक्रिया राज्य की पूर्वनिर्धारित नीति और वैधानिक प्रक्रियाओं के अनुसार पूरी की गई है। उन्होंने दावा किया कि हर वर्ग को संवैधानिक दायरे में रहकर प्रतिनिधित्व दिया गया है और सुप्रीम कोर्ट की सिफारिशों के आधार पर ही ओबीसी आरक्षण सुनिश्चित किया गया।

चमोली ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करण माहरा के बयानों पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें निकाय आरक्षण की प्रक्रिया और इसके पीछे की कानूनी संरचना को समझने की जरूरत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में नगर निगम, पालिका और पंचायतों में आरक्षण डेमोग्राफी के आधार पर तय किया गया है। नगर निगमों में एससी को 9%, पालिकाओं में 14%, और नगर पंचायतों में 13% आरक्षण दिया गया है। वहीं, महिलाओं को सभी निकायों में 33% आरक्षण सुनिश्चित किया गया है।


चमोली ने बताया कि ओबीसी वर्ग को नगर निगम में 18%, पालिका में 27.9%, और पंचायत में 34.8% आरक्षण दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग को नगरपालिका और नगर पंचायत अध्यक्ष की एक-एक सीट आरक्षित की गई है।

कांग्रेस का पलटवार
दूसरी ओर, कांग्रेस ने भाजपा के इन दावों को खारिज करते हुए आरक्षण प्रक्रिया को भेदभावपूर्ण और अस्पष्ट बताया। कांग्रेस का कहना है कि भाजपा सरकार ने आरक्षण प्रक्रिया को जल्दबाजी में लागू किया है, जिससे कई वर्गों को न्याय नहीं मिल पाया है।

चुनाव टालने की कोशिश या हार का डर?
चमोली ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस पहले चुनाव में देरी का आरोप लगाती रही, लेकिन अब हार के डर से चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रही है। उन्होंने दावा किया कि प्रवर समिति ने गहन विचार-विमर्श के बाद अपनी सिफारिशें दी थीं, जिसके आधार पर सरकार ने अध्यादेश लाकर आरक्षण को अंतिम रूप दिया।

चमोली ने कांग्रेस पर जनता को भ्रमित करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस अब खुद चुनाव से बचने के लिए बहाने तलाश रही है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं को सलाह दी कि संवेदनशील मुद्दों पर बयान देने से पहले उन्हें पूरी जानकारी जुटानी चाहिए।

निकाय चुनावों का भविष्य
उत्तराखंड में निकाय चुनाव की तारीखें अभी तय नहीं हैं, लेकिन आरक्षण को लेकर शुरू हुई यह बहस अब सियासी जंग का रूप ले चुकी है। देखना होगा कि यह विवाद चुनावों के समय और प्रक्रिया को कैसे प्रभावित करेगा।

This article is based on a press release issued by the Bhartiya Janta Party. While GNN has adapted the content for journalistic clarity and neutrality, the information and views presented originate from the press release. For More info, CLICK HERE.

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