देहरादून: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह द्वारा स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के आवास पर धरना देने के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसे सियासी स्टंट करार दिया है, वहीं कांग्रेस इसे जनहित से जुड़ी मांगों को लेकर मजबूरी में उठाया गया कदम बता रही है।
भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने इस धरने को अनुचित बताते हुए कहा कि भाजपा सरकार के सभी मंत्री जनता और विपक्ष के लिए हमेशा सुलभ रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह अपनी पार्टी में चल रही उथल-पुथल से ध्यान हटाने और आगामी निकाय व पंचायत चुनावों के मद्देनजर खुद को आक्रामक दिखाने के लिए ऐसे कदम उठा रही है।
चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत भाजपा सरकार के सभी मंत्री विपक्ष के साथ संवाद करते रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कई उल्लेखनीय कार्य हुए हैं।
दूसरी ओर, कांग्रेस का कहना है कि सरकार विपक्ष की मांगों को गंभीरता से नहीं ले रही। प्रीतम सिंह ने आरोप लगाया कि मंत्री के क्षेत्र भ्रमण पर होने के बावजूद उनके आवास पर कोई प्रतिनिधि उपलब्ध नहीं था, जिससे समस्याओं को सामने रखने का कोई माध्यम नहीं बचा।
चौहान ने कांग्रेस नेता के धरने को "प्रेशर पॉलिटिक्स" बताते हुए कहा कि समस्याओं का समाधान धरना-प्रदर्शन से नहीं बल्कि वार्ता से संभव है। उन्होंने कहा कि प्रीतम सिंह जैसे वरिष्ठ नेता का यह कदम उनकी मंशा पर सवाल उठाता है।
कांग्रेस ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि यह प्रदर्शन जनता की परेशानियों को लेकर था, और सरकार की उदासीनता ने उन्हें ऐसा कदम उठाने के लिए मजबूर किया।
यह घटनाक्रम आगामी चुनावों और विपक्षी दलों की रणनीतियों के बीच सत्ता और विरोध की राजनीति का नया आयाम पेश करता है। जनता के मुद्दों पर समाधान के लिए संवाद का कितना महत्व है, यह बहस का विषय बना हुआ है।
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